पाठ्यक्रम: GS2/ अंतर्राष्ट्रीय संबंध
समाचार में
- 10वाँ भारतीय महासागर संवाद (IOD) नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसका विषय था “परिवर्तनशील विश्व में भारतीय महासागर क्षेत्र”।
परिचय
- भारत ने IORA अध्यक्ष (2025–27) के रूप में इस मंच का उपयोग समुद्री सुरक्षा, नीली अर्थव्यवस्था शासन और नवाचार को अपनी MAHASAGAR दृष्टि के अंतर्गत प्रमुखता देने हेतु किया।
- यह संवाद पश्चिम एशियाई संघर्ष की तीव्रता, होरमुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान, और मार्च 2026 में श्रीलंका के निकट ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena के डूबने की पृष्ठभूमि में और अधिक महत्वपूर्ण हो गया।
भारतीय महासागर रिम एसोसिएशन(IORA)
- IORA एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना 7 मार्च 1997 को हुई थी। इसका विचार दक्षिण अफ्रीका के तत्कालीन राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने 1995 में भारत यात्रा के दौरान प्रस्तुत किया था।
- प्रारंभ में इसे हिंद महासागर रिम पहल(IORI) कहा गया, बाद में क्षेत्रीय सहयोग के लिए हिंद महासागर रिम संघ(IOR-ARC) और अंततः वर्तमान नाम मिला।
- IORA सचिवालय एबेने, मॉरीशस में स्थित है, जिसका नेतृत्व एक निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्त महासचिव करते हैं।
- इसका सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय मंत्रिपरिषद (COM) है, जिसकी बैठक वार्षिक रूप से होती है।

- वर्तमान में इसमें 23 सदस्य राष्ट्र और 12 संवाद साझेदार शामिल हैं।

भारत के लिए IORA का महत्व
- नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर की भूमिका: भारत की SAGAR (2015) और MAHASAGAR (2025) नीतियाँ भारत को पसंदीदा सुरक्षा साझेदार और प्रथम प्रत्युत्तरदाता के रूप में स्थापित करती हैं। IORA इस भूमिका को वैध बहुपक्षीय मंच प्रदान करता है।
- चीनी प्रभाव का संतुलन: चीन IORA में केवल संवाद साझेदार है, सदस्य राष्ट्र नहीं। यह संरचनात्मक तथ्य भारत को नेतृत्व का अवसर देता है। IORA, भारतीय नेतृत्व में, चीन की BRI जैसी ऋण-प्रधान व्यवस्था का विकल्प प्रस्तुत करता है।
- ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा: IORA भारत का संस्थागत तंत्र है जो समुद्री मार्गों को संकट से पहले कूटनीति द्वारा स्थिर बनाए रखता है।
- नीली अर्थव्यवस्था और आर्थिक विविधीकरण: IORA का नीली अर्थव्यवस्था पर ध्यान भारत को क्षेत्रीय मानक तय करने, निवेश आकर्षित करने और सतत समुद्री संसाधन उपयोग हेतु साझेदारी बनाने में सहायता करता है।
- कूटनीतिक महत्व: IORA उन कुछ बहुपक्षीय मंचों में से है जहाँ भारत संस्थापक और वर्तमान अध्यक्ष है। यह भारत को UNCLOS, नौवहन स्वतंत्रता, सतत मत्स्य पालन और समुद्री विवाद समाधान पर नियम बनाने का अवसर देता है।
- विशिष्ट पहचान: BIMSTEC, Quad, SCO, IONS और G20 जैसे अन्य समूहों से अलग IORA का मूल्य इसकी भौगोलिक कवरेज है, जो पूर्वी अफ्रीका, अरब प्रायद्वीप, दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया को एक साथ लाता है।
- सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक पहुँच: IORA का पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान क्षेत्र भारत को ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने और 23 देशों में सॉफ्ट पावर प्रदर्शित करने का अवसर देता है।
- आपदा कूटनीति और मानवीय नेतृत्व: भारत 2004 की सुनामी से लेकर म्यांमार में चक्रवात नार्गिस तक प्राकृतिक आपदाओं में प्रथम प्रत्युत्तरदाता रहा है। IORA का आपदा जोखिम प्रबंधन ढाँचा इस भूमिका को संस्थागत करता है।
- इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक गहराई: IORA भारत को अफ्रीकी और खाड़ी देशों के साथ साझेदारी सुनिश्चित कर इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक लाभ देता है।
भारतीय महासागर का महत्व
- भारत के 90% से अधिक व्यापार (आयतन के आधार पर) और 85% से अधिक कच्चे तेल का आयात भारतीय महासागर से होकर होता है।
- वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25% भारतीय महासागर क्षेत्र से गुजरता है।
- भारत के लगभग 95% व्यापार (आयतन) और 68% (मूल्य) समुद्री मार्गों से होता है।
- भारत के कुल माल निर्यात का लगभग 30–35% लाल सागर–स्वेज नहर मार्ग से होता है, विशेषकर यूरोप, उत्तरी अमेरिका और उत्तरी अफ्रीका के लिए।
IORA की प्रभावशीलता को सीमित करने वाली चुनौतियाँ
- संस्थागत कमजोरी: IORA स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं और सर्वसम्मति पर आधारित है, इसमें प्रवर्तन तंत्र का अभाव है।
- भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता: पाकिस्तान को IORA से बाहर रखना भारत-पाक तनावों को दर्शाता है, जैसा SAARC में देखा गया।
- खंडित क्षेत्रवाद: IORA अन्य 14 क्षेत्रीय/अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से प्रतिस्पर्धा करता है, जिससे इसका सामंजस्य कमजोर हो सकता है।
- असमान विकास: UAE, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों के साथ मोज़ाम्बिक, कोमोरोस और सोमालिया जैसे कमज़ोर अर्थव्यवस्था वाले देशों का सम्मिलन असमान लाभ उत्पन्न करता है।
- सीमित सुरक्षा जनादेश: IORA का चार्टर द्विपक्षीय विवादों को चर्चा से बाहर रखता है, जिससे पश्चिम एशियाई युद्ध जैसे मुद्दों पर विचार करना कठिन हो जाता है।
- सैन्य आयाम का अभाव: Quad या IONS की तरह IORA में संयुक्त नौसैनिक अभियानों या सैन्य प्रतिक्रिया का तंत्र नहीं है।
आगे की राह
- समुद्री डोमेन जागरूकता को सुदृढ़ करना: उपग्रह निगरानी, सूचना-साझाकरण और वास्तविक समय समन्वय प्रणालियों का विस्तार।
- नीली अर्थव्यवस्था का संस्थाकरण: सतत मत्स्य पालन, समुद्री प्रदूषण नियंत्रण और समुद्री आर्थिक गतिविधियों हेतु मानक बनाना।
- गैर-पारंपरिक खतरों पर सहयोग: समुद्री डकैती, IUU (अवैध, अपंजीकृत, अनियमित) मत्स्य पालन, मादक पदार्थ तस्करी और जलवायु-जनित आपदाओं पर सहयोग।
- IORA का बजट और शासन विस्तार: भारत ने शिपिंग, तेल, गैस और पर्यटन जैसे समुद्री क्षेत्रों से सार्वजनिक-निजी साझेदारी द्वारा IORA की संस्थागत क्षमता बढ़ाने का संकल्प लिया है।
- समुद्री मानव पूँजी निर्माण: समुद्री केंद्रित पाठ्यक्रमों हेतु शैक्षणिक साझेदारी विकसित कर क्षेत्रीय कार्यबल तैयार करना, विशेषकर नीली अर्थव्यवस्था क्षेत्रों के लिए।
Source: TH
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